Computer Virus Protection: बिना एक भी रुपया खर्च किए अपने कंप्यूटर को वायरस और हैकर्स से कैसे बचाएं?
विंडोज डिफेंडर (Windows Defender): आपका मुफ्त और सबसे शक्तिशाली बॉडीगार्ड
अगर आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में Windows 10 या Windows 11 का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको बाहर से कोई भी एंटीवायरस खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ही एक इन-बिल्ट (पहले से मौजूद) एंटीवायरस देती है जिसे Windows Defender या Windows Security कहा जाता
यह बाजार के महंगे एंटीवायरस से बेहतर क्यों है?
• हल्का और तेज:बाजार के दूसरे एंटीवायरस बैकग्राउंड में बहुत ज्यादा रैम (RAM) और प्रोसेसर की ताकत चूसते हैं, जिससे कंप्यूटर स्लो हो जाता है। लेकिन विंडोज डिफेंडर सिस्टम के साथ पूरी तरह घुला-मिला होता है, इसलिए यह आपके कंप्यूटर को कभी धीमा नहीं करता।
• लगातार अपडेट: माइक्रोसॉफ्ट की टीम दुनिया भर के नए खतरों पर नजर रखती है और हर दिन इसके डेटाबेस को ऑटोमैटिक अपडेट करती रहती है।
• पूरी तरह मुफ्त: इसके लिए आपको कभी भी कोई सब्सक्रिप्शन या रीचार्ज कराने की जरूरत नहीं होती।
आपको क्या करना है?
बस अपने कंप्यूटर की सेटिंग्स में जाएं, 'Update & Security' पर क्लिक करें और यह सुनिश्चित करें कि आपका Windows Security हमेशा ऑन (चालू) रहे।
विंडोज अपडेट को कभी न करें नजरअंदाज
कंप्यूटर यूजर की सबसे बुरी आदत यह होती है कि जब भी स्क्रीन पर 'Windows Update' का नोटिफिकेशन आता है, तो लोग उसे 'Remind me later' (बाद में याद दिलाएं) करके टाल देते हैं। यह छोटी सी लापरवाही हैकर्स के लिए किसी खुले दरवाजे की तरह काम करती है।
अपडेट करना क्यों जरूरी है?
हैकर्स हमेशा विंडोज सॉफ्टवेयर के अंदर किसी न किसी कमी या कमजोरी (Security Loophole) की तलाश में रहते हैं। जैसे ही माइक्रोसॉफ्ट को इस कमी का पता चलता है, वह उसे ठीक करने के लिए एक 'Security Patch' या अपडेट जारी करती है। अगर आप अपने कंप्यूटर को अपडेट नहीं करेंगे, तो वह कमजोरी वैसी की वैसी ही बनी रहेगी और हैकर्स आसानी से आपके सिस्टम में सेंध लगा देंगे। इसलिए, हफ्ते में कम से कम एक बार अपने कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़कर अपडेट जरूर चेक करें।
इंटरनेट ब्राउजिंग के दौरान रखें इन 3 बातों का ध्यान
90% से ज्यादा वायरस हमारे कंप्यूटर में इंटरनेट के जरिए ही दाखिल होते हैं। जब हम गूगल पर कुछ सर्च कर रहे होते हैं या कोई फिल्म या गाना डाउनलोड करने की कोशिश करते हैं, तो हम अनजाने में कुछ ऐसी वेबसाइट्स पर पहुंच जाते हैं जो खतरों से भरी होती हैं।
सुरक्षित रहने के अचूक नियम:
• HTTPS का निशान देखें: किसी भी वेबसाइट पर अपनी कोई भी जानकारी (जैसे नाम, ईमेल या पासवर्ड) डालने से पहले ब्राउज़र के एड्रेस बार में देखें कि वहां एक छोटा सा 'ताले' का निशान बना है या नहीं। अगर वेबसाइट के नाम के आगे https:// लिखा है, तो वह सुरक्षित है। अगर सिर्फ http:// लिखा है या 'Not Secure' का बोर्ड लगा है, तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें।
• फ्री डाउनलोड के लालच से बचें: इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट्स होती हैं जो दावा करती हैं कि वे आपको ₹5000 का सॉफ्टवेयर या कोई नई ब्लॉकबस्टर फिल्म बिल्कुल मुफ्त में डाउनलोड करने देंगी। ऐसी वेबसाइट्स के 'Download' बटन पर क्लिक करते ही बैकग्राउंड में खतरनाक मैलवेयर फाइलें आपके कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाती हैं।
• पॉप-अप विज्ञापनों से दूर रहें: ब्राउज़िंग के दौरान अचानक स्क्रीन पर आ जाता है कि "आपका कंप्यूटर खतरे में है, वायरस साफ करने के लिए यहाँ क्लिक करें"। यह खुद एक वायरस होता है। ऐसे किसी भी नकली चेतावनी पर क्लिक न करें।
ईमेल और व्हाट्सएप लिंक्स की चालाकी को समझें
आजकल हैकर्स लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए फिशिंग (Phishing) का सहारा लेते हैं। इसमें आपको एक ऐसा ईमेल या मैसेज भेजा जाता है जिसे देखकर लगता है कि यह आपकी बैंक, फेसबुक या किसी बड़ी नामी कंपनी की तरफ से आया है।
हैकर्स कैसे जाल बुनते हैं?
आपको एक मेल आ सकता है जिसमें लिखा होगा: "आपके बैंक अकाउंट में कुछ संदिग्ध गतिविधि हुई है, इसे ठीक करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना पासवर्ड बदलें।" जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, एक नकली वेबसाइट खुलती है जो बिल्कुल असली जैसी दिखती है। वहां अपना पासवर्ड डालते ही आपका अकाउंट हैक हो जाता है।
बचाव का तरीका: कोई भी बैंक या सुरक्षित कंपनी कभी भी ईमेल या मैसेज पर आपका पासवर्ड या पिन नंबर नहीं मांगती। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले की ईमेल आईडी को ध्यान से चेक करें।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को आज ही ऑन करें
मान लीजिए कि किसी हैकर को किसी तरीके से आपके जीमेल, फेसबुक या नेट बैंकिंग का असली पासवर्ड पता चल भी गया। तब भी वह आपके अकाउंट को नहीं खोल पाएगा, अगर आपने Two-Factor Authentication (2FA) को चालू कर रखा है।
यह क्या बला है?
यह आपके अकाउंट की सुरक्षा की एक दूसरी दीवार है। इसे ऑन करने के बाद, जब भी कोई (या आप खुद) किसी नए कंप्यूटर में आपका पासवर्ड डालेगा, तो तुरंत आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) या नोटिफिकेशन आएगा। जब तक वह ओटीपी नहीं डाला जाएगा, अकाउंट लॉग इन नहीं होगा। चूंकि मोबाइल आपके हाथ में है, इसलिए हैकर पासवर्ड जानने के बाद भी लाचार हो जाएगा। अपने सभी जरूरी सोशल मीडिया और बैंकिंग ऐप्स में इस सेटिंग को आज ही चालू करें।
ब्राउज़र एक्सटेंशन (Extensions) का सही इस्तेमाल
हम सब इंटरनेट चलाने के लिए गूगल क्रोम (Google Chrome) या माइक्रोसॉफ्ट एज (Microsoft Edge) का इस्तेमाल करते हैं। अपने ब्राउज़र को सुरक्षित बनाने के लिए आप कुछ मुफ्त और बेहतरीन टूल्स यानी एक्सटेंशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
• Ad-Blocker का इस्तेमाल करें: uBlock Origin जैसा एक अच्छा और मुफ्त एड-ब्लॉकर अपने ब्राउज़र में जोड़ें। यह इंटरनेट चलाते समय दिखने वाले उन फालतू और खतरनाक विज्ञापनों को रोक देता है जिनमें वायरस छिपे होते हैं।
• मालिशियस साइट ब्लॉकर: कई एक्सटेंशन ऐसे होते हैं जो किसी भी खतरनाक वेबसाइट पर जाने से पहले ही स्क्रीन पर बड़ा सा लाल सिग्नल दिखा देते हैं कि आगे जाना सुरक्षित नहीं है।
अनजान पेनड्राइव (USB Drive) लगाने की गलती न करें
कंप्यूटर में वायरस आने का एक और बहुत बड़ा जरिया है पेनड्राइव। जब आप अपने किसी दोस्त या किसी अनजान व्यक्ति की पेनड्राइव को सीधे अपने कंप्यूटर में लगा देते हैं, तो कई बार उस पेनड्राइव के अंदर मौजूद वायरस खुद-ब-खुद आपके कंप्यूटर में ट्रांसफर हो जाते हैं।
सुरक्षित तरीका: जब भी कोई पेनड्राइव अपने पीसी में लगाएं, तो उसे सीधा डबल-क्लिक करके न खोलें। सबसे पहले उस पर राइट-क्लिक करें और 'Scan with Windows Defender' विकल्प को चुनें। जब विंडोज कह दे कि यह साफ है, तभी उसके अंदर की फाइलों को खोलें।
निष्कर्ष

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