भारत टैक्सी की तर्ज पर शुरू होगी नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह का बड़ा ऐलान
| अमित शाह- फोटो |
मुख्य बातें:
• सहकारिता मंत्रालय के 5वे स्थापना दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने किया बड़ा ऐलान।
• 'भारत टैक्सी' के सफल सहकारी बिजनेस मॉडल पर आधारित होगी नई जीवन बीमा कंपनी 'CLIC'।
• ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों को बेहद कम प्रीमियम पर मिलेगा जीवन बीमा का सुरक्षा कवच।
• अगले दो वर्षों में 'भारत टैक्सी' कैब सेवा का देश के 500 शहरों मे किया जाएगा विस्तार।
नई दिल्ली:
भारत के सहकारिता क्षेत्र को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री 'अमित शाह' ने नई दिल्ली में आयोजित सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर देश के करोड़ों नागरिकों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि देश में 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर एक नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी की शुरुआत की जाएगी। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण इलाकों, किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक किफायती और पारदर्शी जीवन बीमा का लाभ पहुंचाना है। अमित शाह ने साफ किया कि यह नई बीमा कंपनी निजी क्षेत्र के एकाधिकार को चुनौती देगी और पूरी तरह से आम जनता के हितों के लिए काम करेगी।
सहकारिता मंत्रालय के 5 साल: 'सहकार से समृद्ध' का नया रोडमैप
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पिछले 5 वर्षों में मंत्रालय द्वारा किए गए ऐतिहासिक सुधारो का लेखा- जोखा पेश किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया था, जिसने दम तोड़ते हुए सहकारिता आंदोलन को एकरेखा 'जीवन रेखा' देने का काम किया है। अमित शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आज भारत में लगभग 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिसने 30 करोड़ से भी ज्यादा लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले सहकारिता दायरा केवल चीनी मिलों, डेयरी और खाद तक ही सीमित माना जाता था, लेकिन पिछले 5 वर्षों में मोदी सरकार ने इसे वित्तीय सेवाओं, आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़कर इसका कायाकल्प कर दिया है।
भारत टैक्सी मॉडल की तीन बड़ी खूबियां:
1. नो- कमीशन पॉलिसी: निजी एग्रीगेटर कंपनियां जहां ड्राइवरों की कमाई का 20 से 30 फ़ीसदी हिस्सा कमीशन के रूप में काट लेती है, वहीं भारत टैक्सी जीरो-कमिशन मॉडल पर काम करती है। इसका पूरा फायदा सीधे ड्राइवरों को मिलता है।
2. पारदर्शी और सस्ती सेवा: ग्राहकों को बिना किसी 'सरचार्ज' या छिपे हुए शुल्क के सुरक्षित सफर की सुविधा मिलती है।
3. देशव्यापी विस्तार का लक्ष्य: वर्तमान में यह सेवा कई बड़े शहरों में सफलतापूर्वक चल रही है। अमित शाह ने ऐलान किया कि अगले 2 सालों के भीतर भारत टैक्सी का दायरा बढ़ाकर इसे देश के 500 से अधिक शहरों में शुरू कर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीमा क्षेत्र में भी ठीक इसी प्रकार का एक पारदर्शी,नो- प्रॉफिट- लॉस और पूरी तरह से जनता के प्रति जवाबदेह मॉडल लागू किया जाएगा, जिसका नाम कॉपरेटिव लाइफ इंश्योरेंस कंपनी होगा।
देश को क्यों है सहकारी जीवन बीमा कंपनी की जरूरत?
वर्तमान में भारतीय बीमा बाजार में भारतीय जीवन बीमा निगम(LIC) के साथ- साथ दो दर्जन से अधिक निजी बीमा कंपनियां काम कर रही हैं। इसके बावजूद, आज भी ग्रामीण भारत की एक बहुत बड़ी आबादी के पास किसी भी प्रकार का जीवन बीमा कवच नहीं है। निजी कंपनियां अक्सर बड़े शहरों और उच्य आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर महंगी पॉलसिया बेचती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के लिए बीमा का प्रीमियम भर पाना बेहद मुश्किल होता है। प्रस्तावित सहकारी जीवन बीमा कंपनी इसी खाई को पाटने का काम करेगी:
• सस्ता और सुलभ प्रीमियम: सहकारी मॉडल होने के कारण कंपनी का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षा देना होगा। इस वजह से इसके प्रीमियम की दरें बेहद कम होगी।
• इफको- टोकियो की सफलता से ली प्रेरणा: अमित शाह ने बताया कि खाद्य क्षेत्र की दिग्गज सहकारी संस्था 'इफको पहले से ही जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में 'इफको- टोकियो' के माध्यम से बेहतरीन काम कर रही है। अब इसी तर्ज पर जीवन बीमा के क्षेत्र में कदम रखा जा रहा है।
• स्थानीय समितियों का सहयोग: इस कंपनी को जमीनी स्तर पर चलाने के लिए देश भर के प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों का सहयोग लिया जाएगा, जिससे ग्रामीण लोगों का भरोसा इस पर सबसे ज्यादा होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए अन्य बड़े रिफॉर्म्स
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री ने केवल बीमा ही नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदलने वाले कई अन्य डिजिटल प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन और शीलान्यास किया:
1. 50,000 PACS का पूरी तरह डिजिटलीकारण: देश की 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को अब e- pacs में बदल दिया गया है। इससे किसानों को लोन मिलने और खाद -बीज की मैपिंग मे पूरी पारदर्शिता आएगी।
2. अनाज भंडारण क्षमता का विस्तार: सरकार ने सहकारिता के तहत 135 नए और पुराने गोदामों का स्थानांतरण व उद्घाटन किया है, जिससे किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकेंगे और उन्हें औने- पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
3. सरकार वन और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी: पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए अमूल और NCCF के सहयोग से सहकार वन की नींव रखी गई। साथ ही सहकारिता के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए गुजरात के आणंद में 'त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय' की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
निष्कर्ष:
अमित शाह द्वारा 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी शुरू करने का यह ऐलान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के 'सहकार से समृद्धि' के सपने को सच करने वाला एक क्रांतिकारी कदम है, कॉर्पोरेट घरानो के प्रभुत्व वाले इंश्योरेंस सेक्टर में सहकारी कंपनी का आना इस बात का सबूत है कि अब देश के 30 करोड़ सहकारी सदस्य खुद अपनी आर्थिक सुरक्षा तय कर सकेंगे। आने वाले समय में जब इस कंपनी को इंश्योरेंस रेगुलेटर से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, तो यह देश के कोने-कोने में रहने वाले गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए एक वरदान साबित होगी। निश्चित रूप, से मोदी सरकार का यह फैसला भारत के आर्थिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह याद रखा जाएगा।
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