भारत-ब्रिटेन FTA लागू: व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार, जानिए देश और आपको क्या मिलेगा फायदा?

भारत- यूके FTA से बढ़ेगे ब्यापार और निवेश के अवसर। PM मोदी - फोटो 

 भारत और ब्रिटेन (UK) के रिश्तों में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव आ गया है। दोनों देशों के बीच काफी समय से जिस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement - FTA) यानी मुक्त व्यापार समझौते को लेकर चर्चा चल रही थी, वह अब आधिकारिक तौर पर लागू हो चुका है। आज के समय में जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव चल रहा है, ऐसे में इस समझौते को भारत और ब्रिटेन दोनों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा माना जा रहा है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, इस समझौते का सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि दोनों देशों के बीच होने वाले आपसी व्यापार को साल 2030 तक बढ़ाकर 120 अरब डॉलर तक पहुँचाया जाए। यह समझौता सिर्फ बड़े-बड़े उद्योगपतियों या कंपनियों के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि हमारे देश के छोटे व्यापारियों (MSMEs), नौकरी करने वाले युवाओं और आम जनता के लिए भी बड़े फायदे लेकर आया है।

आसान शब्दों में समझिए: क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)?

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होता क्या है? इसे बिल्कुल सरल भाषा में समझें तो जब दो देश आपस में मिलकर यह तय करते हैं कि वे एक-दूसरे के यहाँ से आने-जाने वाले सामानों पर लगने वाले सरकारी टैक्स (कस्टम ड्यूटी या आयात शुल्क) को या तो बिल्कुल खत्म कर देंगे या बहुत कम कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कहा जाता है।
ऐसा करने से दोनों देशों के व्यापारियों को अपना सामान दूसरे देश में बेचना बहुत सस्ता और आसान हो जाता है। भारत और ब्रिटेन के बीच भी अब यही होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बाजार एक-दूसरे के लिए पूरी तरह खुल गए हैं।
यह समझौता कैसे और क्यों हुआ? (इसकी पृष्ठभूमि)
भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते को लेकर बातचीत आज या कल में शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत साल 2022 में हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों और मंत्रियों के बीच लगभग 14 से भी ज़्यादा दौर की लंबी बैठकें हुईं। कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आईं जब लगा कि बातचीत रुक जाएगी, क्योंकि दोनों देश अपने-अपने व्यापारियों के हितों की रक्षा करना चाहते थे।
लेकिन आखिरकार, दोनों देशों ने आपसी सहमति से रास्ता निकाल लिया और अब इसे पूरी तरह जमीन पर उतार दिया गया है। जब से ब्रिटेन यूरोपीय संघ (EU) से अलग हुआ है, तब से वह भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ जुड़ना चाहता था। वहीं भारत के लिए भी ब्रिटेन एक ऐसा दरवाजा है जिसके जरिए वह पूरे यूरोप के बाजार में अपनी धाक जमा सकता है।
भारतीय निर्यातकों के लिए लॉटरी: 99% सामानों पर टैक्स हुआ खत्म
इस समझौते का सबसे बड़ा और सीधा फायदा भारत से सामान बाहर भेजने वाले (Export करने वाले) व्यापारियों को मिलने वाला है। शर्तों के मुताबिक, ब्रिटेन ने भारत से आने वाले लगभग 99% सामानों पर से इम्पोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क को पूरी तरह हटा दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि अब भारत में बनी चीजें जब ब्रिटेन के बाजारों में बिकने जाएंगी, तो उन पर कोई फालतू टैक्स नहीं लगेगा। इससे हमारा सामान वहां सस्ता हो जाएगा और लोग चीनी या अन्य देशों के सामानों के बजाय भारतीय सामान ज्यादा खरीदेंगे।
इन प्रमुख क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा:
•  कपड़ा उद्योग (Textiles & Garments): भारत के कपड़ा और रेडीमेड कपड़ों के कारोबार के लिए ब्रिटेन एक बहुत बड़ा मार्केट है। टैक्स हटने से भारत के कपड़ों की डिमांड वहां बहुत तेजी से बढ़ेगी, जिससे हमारे देश के बुनकरों और कपड़ा मिलों को बहुत काम मिलेगा।
•  रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery): भारत के सोने-चांदी के गहने और तराशे हुए हीरे पूरी दुनिया में मशहूर हैं। अब ब्रिटेन के लोग भारत के सुंदर आभूषण बिना किसी भारी टैक्स के खरीद सकेंगे। इससे सूरत और मुंबई के हीरा कारोबारियों को बहुत फायदा होगा।
•  दवाइयाँ (Pharmaceuticals): भारत को दुनिया की 'फार्मेसी' कहा जाता है क्योंकि हम सबसे सस्ती और अच्छी दवाइयाँ बनाते हैं। अब भारत की जेनेरिक दवाइयों को ब्रिटेन में बहुत आसानी से मंजूरी मिल जाएगी, जिससे हमारी कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा।
•  इंजीनियरिंग सामान: भारत में बनने वाले लोहे, स्टील और गाड़ियों के कलपुर्जे (Auto Components) अब सीधे लंदन और ब्रिटेन के दूसरे बड़े शहरों की फैक्ट्रियों तक आसानी से पहुँच सकेंगे।
आम जनता के लिए खुशखबरी: विदेशी गाड़ियाँ और ब्रांडेड सामान होंगे सस्ते
जहाँ एक तरफ हमारे देश के व्यापारियों को अपना सामान बाहर बेचने का मौका मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत के आम उपभोक्ताओं के लिए भी एक अच्छी खबर है। इस समझौते के तहत भारत ने भी ब्रिटेन से आने वाले बहुत से सामानों पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे कम करने का फैसला किया है।
1. लग्जरी और प्रीमियम कारे: अब तक अगर कोई भारत में ब्रिटेन की बनी शानदार गाड़ियाँ (जैसे जगुआर लैंड रोवर) खरीदता था, तो उसे गाड़ी की कीमत से भी ज़्यादा यानी 100% से भी ऊपर टैक्स देना पड़ता था। अब इस समझौते के बाद, एक तय कोटे के अंदर आने वाली कारों पर इस भारी-भरकम टैक्स को धीरे-धीरे घटाकर सिर्फ 10% पर ले आया जाएगा। इससे शौकीन लोगों के लिए विदेशी गाड़ियाँ खरीदना काफी सस्ता हो जाएगा।
2. स्कॉच व्हिस्की: भारत में ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर 150% का बहुत भारी टैक्स लगता था। इस समझौते के लागू होते ही इस टैक्स को तुरंत घटाकर 75% कर दिया गया है। आने वाले 10 सालों में इसे और कम करके 40% तक लाया जाएगा।
3. रोजमर्रा के प्रीमियम प्रोडक्ट्स: ब्रिटेन के मशहूर ब्रांड्स के कॉस्मेटिक्स (मेकअप का सामान), चॉकलेट, परफ्यूम और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मेडिकल मशीनें भी अब भारत में पहले से काफी कम दामों पर मिलने लगेंगी।
आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए वरदान: डबल टैक्स से मिली मुक्ति
इस पूरे समझौते की सबसे खास बात, जिसे इस डील का 'गेमचेंजर' कहा जा रहा है, वह है आईटी (IT) और सर्विस सेक्टर को मिलने वाली राहत। इसे एक नियम के जरिए लागू किया गया है जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) कहते हैं।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए: पहले जब भी भारत का कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर या आईटी प्रोफेशनल कुछ महीनों या सालों के लिए ब्रिटेन में काम करने जाता था, तो उसकी सैलरी से लगभग 25% हिस्सा वहां की सरकार सोशल सिक्योरिटी या नेशनल इंश्योरेंस के नाम पर टैक्स के रूप में काट लेती थी। चूंकि वह भारतीय नागरिक होता था और कुछ समय बाद वापस भारत आ जाता था, इसलिए उसे उस कटे हुए पैसे का कोई फायदा या रिफंड नहीं मिलता था। यानी उसके पैसे डूब जाते थे।
अब नए नियम के आने के बाद:
•  अगर कोई भारतीय प्रोफेशनल 5 साल तक की अवधि के लिए ब्रिटेन काम करने जाता है, तो उसे वहां यह सोशल सिक्योरिटी टैक्स नहीं देना होगा। शर्त बस इतनी है कि उसका भारत में पीएफ (Provident Fund) कट रहा होना चाहिए।
•  सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस एक फैसले से भारत के 75,000 से ज़्यादा आईटी प्रोफेशनल्स और सैकड़ों कंपनियों के करोड़ों रुपये बचेंगे।
•  इसके साथ ही आईटी, हेल्थकेयर (डॉक्टर-नर्स), पढ़ाई-लिखाई (एजुकेशन) और कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्रों के लोगों के लिए वीजा के नियमों को भी काफी आसान और लचीला बनाया गया है।
देश के किसानों और डेयरी उद्योग को मिला 'सुरक्षा कवच'
कई लोगों को डर था कि ब्रिटेन से सस्ता सामान आने से भारत के छोटे व्यापारियों या किसानों का नुकसान हो सकता है। लेकिन भारत सरकार ने इस मामले में बहुत समझदारी से काम लिया है। देश के किसानों, दूध उत्पादकों और छोटे घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद संवेदनशील चीजों को इस फ्री ट्रेड समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। इसका मतलब है कि इन चीजों पर टैक्स कम नहीं किया जाएगा:
•  डेयरी प्रोडक्ट्स (जैसे दूध, दही, पनीर, घी और मक्खन)
•  अनाज, दालें और कुछ खास तरह की सब्जियां
•  स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान
•  कच्चा सोना और चांदी
इस सुरक्षा चक्र की वजह से ब्रिटेन की बड़ी कंपनियां भारत में अपना सस्ता दूध या कृषि उत्पाद लाकर नहीं बेच पाएंगी, जिससे हमारे गांव और देहात के किसानों की कमाई पर कोई आंच नहीं आएगी।
देश में निवेश बढ़ेगा और युवाओं को मिलेंगी नई नौकरियां
व्यापार के अलावा इस समझौते का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि ब्रिटेन की बड़ी-बड़ी कंपनियां अब भारत में अपना पैसा लगाएंगी, जिसे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) कहा जाता है। ब्रिटिश कंपनियां भारत के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), साफ-सुथरी ऊर्जा (Clean Energy), डिजिटल टेक्नोलॉजी और फिनटेक (बैंकिंग टेक्नोलॉजी) जैसे क्षेत्रों में अरबों रुपये का निवेश करने की तैयारी कर चुकी हैं।
जब विदेशी पैसा भारत में आएगा, तो यहाँ नई फैक्ट्रियां खुलेंगी, नए कॉर्पोरेट ऑफिस बनेंगे और नए रिसर्च सेंटर स्थापित होंगे। इसका सीधा फायदा देश के छोटे और बड़े शहरों के युवाओं को मिलेगा, क्योंकि उनके लिए लाखों की संख्या में नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही हमारे छोटे उद्योगों (MSMEs) को भी ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़ने का मौका मिलेगा।
आगे की चुनौतियाँ: किन बातों का रखना होगा ध्यान?
सारे फायदों के बीच कुछ ऐसी बातें भी हैं जो दोनों देशों के लिए चुनौती बन सकती हैं:
1. क्वालिटी स्टैंडर्ड्स: ब्रिटेन की सरकार अपने देश में आने वाले सामानों की क्वालिटी को लेकर बहुत सख्त है। ऐसे में भारत के छोटे व्यापारियों को अपने सामान की क्वालिटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना होगा, तभी वे वहां टिक पाएंगे।
2. पर्यावरण नियम (Carbon Tax): ब्रिटेन आने वाले समय में पर्यावरण को ध्यान में रखकर कुछ कड़े कानून लाने की सोच रहा है। इससे भारत से जाने वाले स्टील और एल्युमिनियम जैसे भारी सामानों पर थोड़ा असर पड़ सकता है।
3. निवेश सुरक्षा: व्यापार को लेकर तो समझौता हो गया है, लेकिन दोनों देशों के बीच निवेश की सुरक्षा को लेकर एक अलग संधि पर बातचीत अभी भी चल रही है जिसे जल्द पूरा करना होगा।
निष्कर्ष: एक मजबूत भारत की तरफ बढ़ता कदम
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ यह मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ कागजों पर आयात-निर्यात का खेल नहीं है। यह दो बड़े और मजबूत लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते भरोसे और दोस्ती का प्रतीक है।
दुनिया के आर्थिक मंच पर भारत आज जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह समझौता हमारी आर्थिक कूटनीतिक की एक बहुत बड़ी कामयाबी है। अगर हमारे देश के युवा, स्टार्टअप्स और व्यापारी इस समझौते से मिलने वाले मौकों का सही ढंग से इस्तेमाल कर लेते हैं, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा और देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में बहुत मददगार साबित होगा।

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